आवश्यक सामग्री सूची
Essential Samagri Checklistपूजा प्रारंभ करने से पूर्व इन आवश्यक सामग्रियों को सुसज्जित कर लें ताकि पूजन निर्विघ्न संपन्न हो सके।
पवित्र अर्पण एवं वस्त्र
- ✓भगवान गणेश की प्रतिमा/चित्र
- ✓लाल या पीला नया वस्त्र (चौकी हेतु)
- ✓जनेऊ (यज्ञोपवीत)
- ✓गंगाजल या शुद्ध जल
रोली, चंदन एवं पुष्प
- ✓अक्षत (अखंड चावल)
- ✓रोली (कुमकुम), चंदन, हल्दी
- ✓ताजे लाल पुष्प (गुड़हल/गेंदा)
- ✓२१ दूर्वा घास (दूब दल)
दीप, धूप एवं नैवेद्य
- ✓शुद्ध गाय का घी व दीपक
- ✓धूपबत्ती व कपूर
- ✓मोदक या बेसन के लड्डू
- ✓ऋतु फल (केला, सेब) व पान-सुपारी
१६ चरण पूजा विधि (षोडशोपचार)
7-Step Authentic Worship Procedureशांत चित्त एवं श्रद्धापूर्वक इन सात चरणों का अनुसरण करें।
स्थान और तैयारी (शुद्धिकरण)
Sanctification & Preparationस्नान कर स्वच्छ वस्त्र (पीले या लाल रंग के उत्तम माने जाते हैं) धारण करें। पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके कुशा या ऊनी आसन पर बैठें। पूजा स्थान को गंगाजल या शुद्ध जल से पवित्र करें। तांबे के पात्र में शुद्ध जल तथा पास में आचमनी रखें।
पूजा सामग्री की व्यवस्था
Puja Samagri Arrangementकाष्ठ (लकड़ी) की चौकी पर लाल अथवा पीला रेशमी वस्त्र बिछाएं। उस पर भगवान श्री गणेश की सुंदर प्रतिमा अथवा चित्र स्थापित करें। दाईं ओर शुद्ध घी का दीपक तथा बाईं ओर सुगंधित अगरबत्ती/धूप प्रज्वलित करें। अक्षत, रोली, चंदन, दूर्वा एवं मोदक को सहज पहुंच में रखें।
संकल्प एवं ध्यान
Sankalpa & Meditative Invocationदाहिने हाथ में थोड़ा जल, पुष्प एवं अक्षत लेकर मन में आज का दिन, स्थान व अपने परिवार के मंगल एवं विघ्न-निवारण हेतु संकल्प लें। इसके पश्चात दोनों हाथ जोड़कर भगवान गणेश के दिव्य स्वरूप का एकाग्र चित्त से ध्यान करें।
श्री गणेश पंचोपचार पूजन
Sacred Panchopachara Worshipभगवान को जल के छींटे देकर प्रतीकात्मक स्नान कराएं। चंदन एवं कुमकुम का सुंदर त्रिपुंड/तिलक लगाएं। अक्षत अर्पित करें। भगवान को अतिप्रिय २१ दूर्वा दल ‘ॐ गं गणपतये नमः’ बोलते हुए उनके चरणों में अर्पित करें। सुगंधित लाल पुष्प (गुड़हल या गेंदा) चढ़ाएं।
मंत्र एवं प्रार्थना
Mantra Chanting & Prayerशांत भाव से वक्रतुण्ड महाकाय मंत्र, गणेश गायत्री अथवा गणेश मूल मंत्र का कम से कम ११, २१ या १०८ बार श्रद्धापूर्वक जप करें। यदि समय उपलब्ध हो तो श्री गणेश चालीसा का पाठ करें।
नैवेद्य एवं आरती
Naivedya (Bhog) & Maha Aartiभगवान गणेश को उनका प्रिय मोदक, बेसन के लड्डू अथवा ताजे फल का भोग लगाएं। भोग के चारों ओर आचमनी से तीन बार जल घुमाएं। इसके पश्चात पंचमुखी अथवा कपूर के दीप से भक्तिभाव सहित संपूर्ण परिवार के साथ श्री गणेश जी की आरती गाएं।
प्रसाद वितरण एवं क्षमा प्रार्थना
Prasad & Concluding Prayerपूजा की समाप्ति पर अपने स्थान पर ही खड़े होकर तीन बार घड़ी की दिशा में प्रदक्षिणा करें। अंत में ज्ञात-अज्ञात त्रुटियों के लिए प्रभु से क्षमायाचना करें तथा सभी परिजनों में श्रद्धापूर्वक प्रसाद वितरित करें।
पारंपरिक ‘जय गणेश देवा’ आरती संपूर्ण पदों एवं सरल भावार्थ सहित।
वैदिक बीज मंत्र, गायत्री मंत्र एवं सर्वविघ्न निवारक शक्तिशाली मंत्र।
अष्टोत्तर शतनामावली प्रत्येक नाम के दिव्य आध्यात्मिक अर्थ सहित।
गणेश ध्यान एवं क्षमा-प्रार्थना
Dhyana Shloka & Forgiveness Prayerभगवान गणेश का मुख्य ध्यान श्लोक
उमासुतं शोकविनाशकारकं नमामि विघनेश्वरपादपंकजम्॥
भावार्थ: हाथी के मुख वाले, समस्त भूतगणों द्वारा पूजित, कैथ और जामुन के फलों को चाव से ग्रहण करने वाले, माता उमा के पुत्र तथा भक्तों के सभी कष्टों का विनाश करने वाले श्री विघ्नेश्वर के चरण कमलों में हम सादर नमन करते हैं।
पूजा उपरांत क्षमा प्रार्थना
पूजां चैव न जानामि क्षमस्व परमेश्वर॥
अपराधसहस्त्राणि क्रियन्तेऽहर्निशं मया।
दासोऽयमिति मां मत्वा क्षमस्व विघ्नराज॥
भावार्थ: हे प्रभु! मैं न तो आह्वान करना जानता हूँ और न विसर्जन; पूजा की विधि भी मुझसे अनभिज्ञ है। हे परमेश्वर, मुझसे दिन-रात जो हजारों अपराध होते हैं, मुझे अपना अनन्य भक्त समझकर कृपापूर्वक क्षमा करें।
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