॥ श्री गणेशाय नमः ॥

श्री गणेश आरती

श्री गणेश आरती • जय गणेश देवा

पारंपरिक एवं प्रामाणिक श्री गणेश आरती के पावन पाठ में आपका स्वागत है। शुद्ध देवनागरी लिपि और पद-दर-पद आध्यात्मिक भावार्थ सहित, नित्य पूजा, संकीर्तन एवं अध्ययन के लिए प्रस्तुत।

पारंपरिक प्रामाणिक स्तोत्रप्रातः एवं सांध्य पूजा में गायन योग्य
Lord Ganesha idol seated on lotus throne in warm temple sanctum with glowing diyas
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श्री गणेश आरती

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

एकदंत दयावंत, चारभुजाधारी।

माथे पर तिलक सोहे, मूषक की सवारी॥

पान चढ़े, फूल चढ़े, और चढ़े मेवा।

लड्डुअन का भोग लगे, संत करें सेवा॥

अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।

बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया॥

‘सूर’ श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

दीनन की लाज राखो, शंभु सुत वारी।

कामना को पूर्ण करो, जग बलिहारी॥

जय गणेश, जय गणेश, जय गणेश देवा।

माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा॥

॥ आरती फलश्रुति एवं महात्म्य ॥

जो जन नियम से गणेश जी की आरती गाते हैं, उनके समस्त विघ्न दूर होते हैं तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

Whoever sings this traditional Aarti of Lord Ganesha with devotion during daily prayer is blessed with removal of obstacles, mental peace, harmonious beginnings, and auspicious prosperity.

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